दोहे · Reading time: 1 minute

चतुर

चित चपला चंचल चतुर,पकड़ न पाऊँ डोर।
मैं खींचूँ इस ओर तो, वो भागे उस ओर।। १

खुदगरजी की आड़ में, चतुर हुए हैं लोग।
रखते रिश्ते झूठ के, केवल करते ढ़ोंग।। २

वाणी कोयल की तरह,अंतस विषधर नाग ।
नस-नस चतुराई भरा ,जैसे काला काग।। ३

देखी है हर दौर में, एक अनोखी बात।
चतुर हमेशा जीतता,सीधा पाता मात।। ४

कागा नकली पर पहन, चले हंस की चाल।
दुष्ट अहंकारी चतुर ,है कलयुग का लाल।। ५

कलयुग में ज्ञानी वही, जो है चतुर चालाक।
दुष्ट घमंडी लोग का, सभी जगह पर धाक।। ६
-लक्ष्मी सिंह
नई दिल्ली

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