कविता · Reading time: 1 minute

चटख धूप

खत्म हो गई सर्दियां
आ गया अब बसंत
खुशगवार है मौसम
निकली है चटख धूप।।

बैठकर आंगन में सब
धूप सेक रहे है लोग
साथ में बातों का भी
मज़ा ले रहे है लोग।।

मां बच्चों को धूप
सेकने बुला रही है
दादी अम्मा भी धूप में
जाने को कराह रही है।।

सर्दियों के बाद तो धूप
और भी सुहानी हो गई
ठंड की बातें तो अब
बहुत पुरानी हो गई।।

बजुर्गों के लिए तो धूप
सर्दी के बाद संजीवनी है
धूप के सिवा कोई चीज
आज उन्हें नहीं देखनी है।।

काका भी आ गए अब
पड़ोस से सेकने धूप
माहिर है वो भी बड़ी
बड़ी हांकने में खूब।।

छत पर खाट बिछाकर
बैठें है मिलकर सब
मस्ती में पता भी न चला
आ गए ये बादल कब।।

ये क्या इन्होंने तो अब
सूरज को ही ढक दिया
धूप सेकने का सारा मज़ा
ही किरकिरा कर दिया।।

थोड़ी ही देर बाद तेज़
हवाएं चलने लगी
काले बादलों को वो
अब धकेलने लगी।।

बादलों के बीच से धूप
फिर से निकलने लगी
सेकने के लिए चटख
धूप फिर से खिलने लगी।।

5 Likes · 110 Views
Like
You may also like:
Loading...