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** चंद विचार ***

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

कविता

March 9, 2017

कई बार आदमी लाख कौशिश करता है
फिर भी उसका काम सफल नहीं होता
कई बार अल्प कौशिश करने पर भी
मन की मुराद पूरी हो जाती है इसी को
कहते है होई सोई जो राम रची रखा ।।
जो काम राम नहीं कर पाते वह काम
राम के सेवक हनुमान बना देते है ।।
अंजना नन्दन की जय

कब बिगड़ी है दुनियां उसकी
जिसने इंसान से बना के रखी
लोग केवल ढोंग करते है
उसईश्वर से दोस्ती निभाने का
वह तो हमेशा से तत्पर है
हमें गले लगाने को
हमखुद ही उससे दूर भागते हैं
क्योंकि हम संसार चाहते हैं
वो संसार से पार लगाना।।

?मधुप बैरागी

Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more
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