दोहे · Reading time: 1 minute

चंदा घूरे हैं मुझे,

चंदा घूरे हैं मुझे,……. लगा टकटकी आज !
रात चाँदनी मे सखी, किस विध देखूँ ताज !!

रात चाँदनी चाँद की ,कालिंदी कर शोर !
देख नजारा ताज का,मन में उठे हिलोर !!
रमेश शर्मा

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दोहे की दो पंक्तियाँ, करती प्रखर प्रहार ! फीकी जिसके सामने, तलवारों की धार! ! रमेश शर्मा Books: दोहा दर्पण -साझा संकलन दोहा संगम -साझा संकलन दोहा प्रसंग -साझा संकलन…
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