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” घूंघट में अठखेली करते , प्रियतम मेरे मन भाव रे ” !!

भगवती प्रसाद व्यास

भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

गीत

March 7, 2017

जब हटा आवरण देखोगे तो ,
वे गाल गुलाबी होंगे !
अधरों पर लरजन थिरकेगी ,
दो नयन शराबी होंगे !
स्वेद कणों संग भाल पे टिकुली –
झूमेगा वह बोर ठाँव रे !!

जब लरजेगी कानों की लव औ ,
झूम रहा होगा झुमका !
तब कमर कंदौरा हिचकोले ले ,
मारे प्यारा सा ठुमका !
कंठमाल अधर में झूले गुमसुम –
चूनर खायेगी भाव रे !!

जब उन कसे हुए भुजदंडों में ,
होगी कंगना की खन खन!
तब बदहवास सी पायलिया का ,
मज़बूर लगेगा क्रंदन !
रोम रोम पुलकित तन लहराये –
अलकों की होगी छाँव रे!!

Author
भगवती प्रसाद व्यास
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में... Read more
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