कविता · Reading time: 1 minute

घाटी हमारी है !!!

वो लहराते बाग़ हमारे है
खिला गुलशन हमारा है
हम सीना तान कहते है
सारा कश्मीर हमारा है !!

तुम्हारे वँहा कायर बेठे है
हमारे यँहा शायर बैठे है
तुम पीठ पर करते हो वार
फिर भी मिले सदा तुम्हें हार
छोड़ा न उसे जिसने हमे ललकारा है
हम सीना तान कहते है
सारा कश्मीर हमारा है !!

हमेशा मुँह की ही खाते हो
बेमतलब का हक जताते हो
शर्मिंदा होकर ही जाते हो
फिर भी बाज़ ना आते हो
दौड़े चले आये हैं जब माँ ने पुकारा है
हम सीना तान कहते है
सारा कश्मीर हमारा है !!

तुम्हे शोभा नही है देती
बात मजहब ओर धर्म की
कभी मिलती नही कोई दवा
मन में बसाये हुए भरम की
घाटी की पहाड़ियों का अजब नज़ारा है
हम सीना तान कहते है
सारा कश्मीर हमारा है !!

वो लहराते बाग़ हमारे है
खिला गुलशन हमारा है
हम सीना तान कहते है
सारा कश्मीर हमारा है !!

:::::::::::: शैंकी शर्मा ::::::::::::::

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