मुक्तक · Reading time: 1 minute

घर -घर में मंदिर मस्जिद हैं

घर -घर में मंदिर मस्जिद हैं l
फिर भी क्यों इन्साफ नहीं है ll
मन के कोने में बैठा है l
नफरत का शैतान यहाँ है ll
राजकिशोर मिश्र ‘राज’ प्रतापगढ़ी

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