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कोई ज्यादा पीड़ित है तो कोई थोड़ा

बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक

कविता

March 14, 2017

(मुक्त छंद)

सफरचट्ट, मक्खीकट, पतली, कभी ऐंठ में मूँछ|
कभी- कभी लाचार दिखे जैसे कुत्ते की पूँछ ||
ज्यों कुत्ते की पूँछ, मूँछ की हालत ऐसी |
बिना मूछ वाली ने कर दी सब की ऐसी तैसी||
कह “नायक” कविराय पसीना गलमुच्छों ने छोड़ा|
कोई ज्यादा पीड़ित है तो कोई थोड़ा ||

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

उक्त मुक्त छंद ” दैनिक आज” समाचार पत्र कानपुर में दिंनांक-27मई 1999 को प्रकाशित हो चुका है |
1999में मैं उरई में रहता था |
बृजेश कुमार नायक

Author
बृजेश कुमार नायक
एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर,... Read more
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