घनाक्षरी

घनाक्षरी 8 8 8 7
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मेरे प्यारे प्यारे कान्हा
सब के दुलारे कान्हा
माखन सजा है रखा
अाके उसे खाइये ।

ग्वाल बाल साथ आऒ
गोपियों को संग लाओ
तान छेड़ प्रेम धुन
बंसुरी बजाइये

यहाँ वहाँ जहाँ तहाँ
ढूढ़ा तुम्हे कहाँ कहाँ
कुछ भी पता न चला
दरश दिखाइये ।

आसन सजाये रखा
दिल को बिछाये रखा
गीत अब विनती करे
आ के बैठ जाइये ॥

” गीत”

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