घनाक्षरी · Reading time: 1 minute

घनाक्षरी छंद

रिद्धि सिद्धि दायक हैं, कार्य सिद्ध नायक हैं,
जिनकी कृपा से भर, मिट जाते क्लेश हैं।
गौरा जी के लाल प्रिय, देव गणों के जो हिय,
कैलाशी देवाधिपति, पितृ श्री महेश है।
पूरित करें जो काज,पूज्यनीय गजराज,
मोहक भरे जो छटा, हर्षित सुरेश हैं।
मोदक भरे हाथों में,मूसे पर हो सवार,
शत शत है नमन, प्रिय श्री गणेश हैं।।
—- अरुण शर्मा बेधड़क
सीतापुर (उ०प्र०)

100 Views
Like
1 Post · 100 Views
You may also like:
Loading...