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घनाक्षरी छंद ~ फटेहाल बच्चे

घनाक्षरी छंद ~ फटेहाल बच्चे
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स्वयं पे ही सभी रहते हैं वशीभूत अब,
कोई भी किसी की नहीं सुनता जहान में।

भूख और प्यास लिये मरते मनुष्य पर,
लोग तो यकीन अब रखते हैं श्वान में।

श्वान को खिलाया नहलाया व घुमाया जाता,
कभी सड़कों पे कभी कार में बागान में।

किन्तु कई लाख बच्चे हो के फटेहाल हाय,
जूठन गिलास धोते चाय की दुकान में।

– आकाश महेशपुरी

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संक्षिप्त परिचय : नाम- आकाश महेशपुरी (कवि, लेखक) मो. न. 9919080399 मूल नाम- वकील कुशवाहा जन्मतिथि- 15 अगस्त 1980 शैक्षिक योग्यता- स्नातक ॰॰॰ प्रकाशन- सब रोटी का खेल (काव्य संग्रह)…
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