घनर घनर घन मेघा गरजे

घनर घनर घन मेघा गरजे
टप टप टप टप पानी बरसे

मेंढक टर टर टर टर्राये
नाचे मोर पपीहा गाये
लहर लहर लहरायें शाखें
माटी की खुशबू मन भाये
तड़क तड़क कर बिजली चमके
घनर घनर घन मेघा गरजे

इतराये खुद पर हरियाली
पवन चले होकर मतवाली
चंदा सूरज तारे नभ में
बोर हो रहे बैठे खाली
धूप चाँदनी को भी तरसे
घनर घनर घन मेघा गरजे

ये बरसात बड़ी मन भाये
भीग भीग सब खूब नहाये
धुला धुला धरती का आँचल
सावन मंद मंद मुस्काये
गीत मधुर निकले फिर मन से
घनर घनर घन मेघा गरजे

01-07-2018
डॉ अर्चना गुप्ता

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डॉ अर्चना गुप्ता (Founder,Sahityapedia) "मेरी तो है लेखनी, मेरे दिल का साज इसकी मेरे बाद...
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