गज़ल

आकर मेरे कानों में कोई चुपके चुपके कहता है,
इश़्क जुनूँ है इश़्क है पागल देख कलम लिख देती है,

अक्सर छोटी बातों पर उसकी आँखें भर आती हैं,
फैलता रहता है जो काजल देख कलम लिख देती है,

मद्धम मद्धम साँस की ख़ुशबू मीठे मीठे दर्द की आँच,
रह रह कर जब करती बे-कल देख कलम लिख देती है,

मीठे सुरों में दर्द का पंछी अपनी धुन में गाता है,
प्यासी रूहें प्यास का जंगल देख कलम लिख देती है,

प्यार की बूँदें टप टप करके दिल में गिरती रहती हैं,
नर्म गुदाज़ ओ शोख़ ओ चंचल देख कलम लिख देती है “

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