गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

गज़ल

हम तो सुध बुध ही भूल जाते हैं
वो नजर से नजर कभी मिलाते हैं

कौन उल्फत की बात करता है
लोग मतलव से आते’ जाते है

काट दी ज़िंदगी फिर आएगा
जाने वाले न लौट पाते हैं

हाथ पर इक लकीर उसकी है
आओ निर्मल उसे मिटाते है।

ठोकरें दर- ब -दर लगीं लेकिन
खा के फिर उनको भूल जाते है।

हम फकीरों से पूछना क्या अब
भूख मे हंसते गुनगुनाते है

बाप को मुफलिसी कसक दे तब
भूख से बच्चे छटपटाते है

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