Apr 21, 2017 · कविता

गज़ल

गज़ल
-1222—1222—1222—1222
करे हम याद ईश्वर को वही किस्मत सुधारा है
ख़फ़ा होना नहीं हम से मिरा तू ही सहारा है|
तलातुम है घिरी कश्ती भरोसे आज ढूढे ये
मिरी पतवार भी तू ही तूही होगा किनारा है |
ज़मीने हिन्द हे ये हम सभी ही है यहां के ही
बना जीना हमारा भी कुदरत का इशारा है ।
चला जो मै सफ़र पर तो नही भी पल हमारा है ,
उड़ी पथ धूल में पाया बदन को भी गवारा है |
नही खोयू तुफानों डर समय ने ये पुकारा है
लगेगी पार नैया यही रेखा वक्त तुम्हारा है |
रेखा मोहन २१/४/२०१७

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