गज़ल

उसे मैं भूल जाऊं पर भुलाया भी नही जाता
पराया है उसे अपना बनाया भी नहीं जाता
दिये जो प्यार से तोहफे उन्हें तूने जला डाला
तेरा मै खत जला दूँ पर जलाया भी नहीँ जाता
मरीज़े इश्क दुनियां में हजारों रोज़ बनते हैं
खुदी ये रोग लगता है लगाया भी नहीँ जाता
उसे हर बात मेरी जाने क्यों कांटों सी चुभती है
मैं हूँ खामोश अब उसको सताया भी नहीं जाता
मिली सोहरत ज़रा योगी ख़ुदी को रब समझ बैठा
किसी मग़रूर को ये सर झुकाया भी नही जाता

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