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गज़ल

Ankita Kulshreshtha

Ankita Kulshreshtha

गज़ल/गीतिका

October 22, 2016

सभी राज हमसे छिपाए हुए हैं
कभी जो थे अपने पराए हुए हैं

लबों पे हमारे हंसी तुम ना देखो जमाने से’ हम चोट खाए हुए हैं

भले वो न चाहें हमें भूलके भी मगर नाज उनके उठाए हुए हैं

न आवाज कोई न कोई इशारा
न जाने कहां दिल लगाए हुए हैं

खबर क्या उन्हें हम उन्हीं पे फिद़ा हैं कहानी गज़ल में बताए हुए हैं

वही ‘श्रेष्ठ’ दिलवर जिन्हें चाहता हो रहें साथ जो प्यार पाए हुए हैं

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Author
Ankita Kulshreshtha
शिक्षा- परास्नातक ( जैव प्रौद्योगिकी ) बी टी सी, निवास स्थान- आगरा, उत्तरप्रदेश, लेखन विधा- कहानी लघुकथा गज़ल गीत गीतिका कविता मुक्तक छंद (दोहा, सोरठ, कुण्डलिया इत्यादि ) हाइकु सदोका वर्ण पिरामिड इत्यादि|
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