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गज़ल :– बेवजह लोग गंगा नहाते रहे ।।

Anuj Tiwari

Anuj Tiwari "इन्दवार"

गज़ल/गीतिका

March 25, 2017

तरही गज़ल :–
बेवजह लोग गंगा नहाते रहे ।
बहर :– 212–212–212–212

मीठे सपने सदा ही लुभाते रहे ।
रात ख्वाबों में भी मुस्कुराते रहे ।

*हम हमारे ही हाथों ठगाते रहे ।
भाग्य को ही सदा गुनगुनाते रहे ।

कर्म में न दिखाई कभी आस्था ,
हसरतों को गले से लगाते रहे ।*

हाथ अब हाथ धरने से क्या फायदा ,
सारे अवसर तुम्हीं तो गंवाते रहे ।

दाग दामन में था कोई समझा नहीँ ,
बेवजह लोग गंगा नहाते रहे ।

चाँद सूरज धरा ये रहे हैं सदा ,
लोग आते रहे , लोग जाते रहे ।

बदले कितने मुखौटे यहाँ रोज़ तुम ,
आइने से क्यों चहरा छिपाते रहे ।

अनुज तिवारी “इंदवार”
उमरिया
मध्य-प्रदेश

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Author
Anuj Tiwari
नाम - अनुज तिवारी "इन्दवार" पता - इंदवार , उमरिया : मध्य-प्रदेश लेखन--- ग़ज़ल , गीत ,नवगीत ,कविता , हाइकु ,कव्वाली , तेवारी आदि चेतना मध्य-प्रदेश द्वारा चेतना सम्मान (20 फरवरी 2016) शिक्षण -- मेकेनिकल इन्जीनियरिंग व्यवसाय -- नौकरी प्रकाशित... Read more
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