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गज़ल (बात करते हैं )

मदन मोहन सक्सेना

मदन मोहन सक्सेना

गज़ल/गीतिका

July 13, 2016

गज़ल (बात करते हैं )

सजाए मौत का तोहफा हमने पा लिया जिनसे
ना जाने क्यों बो अब हमसे कफ़न उधार दिलाने की बात करते हैं

हुए दुनिया से बेगाने हम जिनके इक इशारे पर
ना जाने क्यों बो अब हमसे ज़माने की बात करते हैं

दर्दे दिल मिला उनसे बो हमको प्यारा ही लगता
जख्मो पर बो हमसे अब मरहम लगाने की बात करते हैं

हमेशा साथ चलने की दिलासा हमको दी जिसने
बीते कल को हमसे बो अब चुराने की बात करते हैं

नजरें जब मिली उनसे तो चर्चा हो गयी अपनी
न जाने क्यों बो अब हमसे प्यार छुपाने की बात करते हैं

गज़ल (बात करते हैं )
मदन मोहन सक्सेना

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Author
मदन मोहन सक्सेना
मदन मोहन सक्सेना पिता का नाम: श्री अम्बिका प्रसाद सक्सेना संपादन :1. भारतीय सांस्कृतिक समाज पत्रिका २. परमाणु पुष्प , प्रकाशित पुस्तक:१. शब्द सम्बाद (साझा काब्य संकलन)२. कबिता अनबरत 3. मेरी प्रचलित गज़लें 4. मेरी इक्याबन गजलें मेरा फेसबुक पेज... Read more
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