गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

गज़ल :– दिल दरवाजा खोल रखा है !!

ग़ज़ल :– दिल दरवाजा खोल रखा है !!

बहर –222—-221—122 !!
!
तुम आयोगी बोल रखा है !
दिल दरवाजे खोल रखा है !!
!
समझाओ तुम इस पगले को !
अन्दर कुछ अनमोल रखा है !!
!
सुंदर साज सुडौल नहीं पर !
ये अपनी काजोल रखा है !!
!
अरमानों की प्रेम क्षुधा में !
मीठे सपने घोल रखा है !!
!
जज्बातों की मापदण्ड का !
हर नक्शा भूगोल रखा है !!

गज़लकार :– अनुज तिवारी “इन्दवार “

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