गज़ल :-- जिसको खुशी हो यार की ऊँची उड़ान से ।।

ग़ज़ल :– जिसको खुशी हो यार की ऊँची उड़ान से !!

वज्न :–221–2121–1221–212
काफ़िया :– आन (आसमान ,उड़ान ,इम्तिहान ,इत्मिनान ,जहान……)
रदीफ :– से
गज़लकार :– अनुज तिवारी “इंदवार”

वो क्या करेगा जीत के भी आसमान से ।
जिसको खुशी हो यार की ऊँची उड़ान से ।

अहले – करम जो यार के मिल जाएँ गर वहाँ ,
वो क्या डरेगा इस जहाँ में इम्तिहान से ।

चाहे यहाँ तू दे मुझे जुलमी करार अब ,
पहले जिगर की आह तो पढ़ इत्मिनान से ।

जो आज थिरकते हैं जनाजे की शान पर ,
जीने दिए न जीते जी वो इस जहान से ।

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 1 Comment 0
Views 180

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share