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गज़ल :– जमीं का चार गज होगा !!

Anuj Tiwari

Anuj Tiwari "इन्दवार"

गज़ल/गीतिका

August 29, 2016

गज़ल :– जमीं का चार गज होगा !!
बहर :– 1222 -1222 -1222 -1222

शिवालय भी सुसज्जित हो सुशोभित आज हज होगा !!
तुम्हारे होंठ से झड़ता जहाँ फूलों क रज होगा !

कहीं मुझको जला दो तुम कहीं उसको दफन कर दो !
वतन की कोंख का हिस्सा जमीं का चार गज होगा !!

भले ही बाँट लो मज़हब कहीं तुम चाँद सूरज में !
समंदर में समाहित वो कुमुदिनी या जलज होगा !!

खुले पर अर्ज करता वो जुड़े मैं मिन्नतें माँगू !
बता आखिर हथेली से कहीं नाता सुलझ होगा !!

गज़लकार :– अनुज तिवारी “इन्दवार”

Author
Anuj Tiwari
नाम - अनुज तिवारी "इन्दवार" पता - इंदवार , उमरिया : मध्य-प्रदेश लेखन--- ग़ज़ल , गीत ,नवगीत ,कविता , हाइकु ,कव्वाली , तेवारी आदि चेतना मध्य-प्रदेश द्वारा चेतना सम्मान (20 फरवरी 2016) शिक्षण -- मेकेनिकल इन्जीनियरिंग व्यवसाय -- नौकरी प्रकाशित... Read more
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