कविता · Reading time: 1 minute

गौं मांता

*?गौ-माता”?*

गाय हमारी वो माता है
जिसे हर युग में पूजा जाता है,
कहते हैं इसकी सेवा कर के,
हर मानव तर जाता है….

जो चाहे जैसे रख ले,
मां कहां शिकायत करती है??
रुखी-सूखी खा कर भी
मां अमृत-वर्षा करती है ॥

इंसान के लिए गाय सर्वस्व काम आए,
चाहे तो धन का सौदा करे,चाहे पुण्य कमाए,

कहते हैं गाय,गीता,गंगा
ये तीनों स्वर्ग की सीढ़ी हैं,
फिर क्यूं इन्हें नजर-अंदाज कर,
आगे बढ़ रही पीढ़ी है ??

यकीं है,
गाै माता के यश-वैभव को
हम फिर वापस लाएंगे,
माना है मां तो पुत्र बन कर,
इसकी लाज बचाएंगे ॥

दिनांक/16/10/2016
? *प्रमोद रघुवंशी*

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