गोपाल दास नीरज

1
शब्दों को भी कर दिया, था भावों का दास ।
‘नीरज’ ने संसार मे, लिखा नया इतिहास।
लिखा नया इतिहास , गमों में हँसते हँसते ।
सजा दिया साहित्य, काव्य को रचते रचते ।
कहे ‘अर्चना’ खूब, छुआ दिल के तारों को।
भावों का संसार, दिया ऐसा शब्दों को।

2
शब्दों की जादूगरी, और गले सुर ताल ।
नीरज जी भी हो गये, गोकुल के गोपाल।
गोकुल के गोपाल, मंच के थे ये हीरो।
हो जाते थे लोग, सामने इनके जीरो।
खूब ‘अर्चना’ धूम, मची इनके गीतों की ।
जाती दिल के पार, धार इनके शब्दों की।

3
अपने गीतों को दिये, नये नये परिवेश ।
मानवता का भी दिया, ‘नीरज’ ने संदेश।
‘नीरज’ ने सन्देश, दिया जीवन जीने का ।
और बहाया खूब, दर्द अपने सीने का ।
किये ‘अर्चना’ सत्य, उन्होंने अपने सपने ।
बाँटा करते प्यार , सभी थे उनके अपने।

डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद

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