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ज्ञान नैनू पकड़, बन अमल दिव्य पथ

बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक

गीत

February 27, 2017

प्रेम शुभ दिव्य सत् ,स्व विचारों को मथ|
ज्ञान नैैनू पकड़, बन अमल दिव्य पथ |

यामिनी के प्रहर- सम तुम्हारी पलक|
प्रीति मन संग खेले, दे रतिमय झलक|
किंतु दिल बोले सद्प्रेेम में वासना
कभी आएगी न, लेता हूँँ शपथ|
प्रेम शुभ……….

सद् सहारा तुम्हारे हृदय फूल का |
दिव्य चाहत की प्यासी, अमल भूल का |
प्रीतिमधु उर चखें, बोध नहिं हो वृथा|
चित्त पर नहीं भारी पड़े, मनमथ |
प्रेम शुभ…….

जग कला, शुचि मुहब्बत के अनुनाद की |
हर्षमय सत् मिलन, सुख के संवाद की |
ईश्वरी पूरे आनंदमय रास की |
आत्मा एक ,दो सिर्फ तनमय सु रथ|

प्रेम शुभ दिव्य सत् , स्व विचारों को मथ|
ज्ञान नैनू पकड़,बन अमल दिव्य पथ|

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

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Author
बृजेश कुमार नायक
एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर,... Read more

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