कविता · Reading time: 1 minute

यूँ ही राधा-कृष्ण का नाम नहीं होता, ….”एस के राठौर”

गुलाब मुहब्बत का पैगाम नहीं होता,
चाँद चांदनी का प्यार सरे आम नहीं होता,
प्यार होता है मन की निर्मल भावनाओं से,
वर्ना यूँ ही राधा-कृष्ण का नाम नहीं होता…

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