कविता · Reading time: 1 minute

गुरू स्मरण

गुरू स्मरण

अभिन्नम् अभिन्नम् अभिन्नम्
गुरू श्री रामशरण बार बार ।
करूँ चरण स्पर्श तुम्हार
बार बार, बार कई हजार ।

शिक्षा दी, आशीष दिया
दिया अति आनंदमय प्यार,
कौशल दिया, ज्ञान दिया
बुद्धि का दिया भण्डार ।
ऐसा गुरू विरला मिले
कोई एक प्रति हजार ।
करूँ चरण स्पर्श तुम्हार …..

कविता दी, सरलार्थ दिया
दिया पाठ का सार
विश्वास दिया, किया उजाला
कलम दिया औज़ार।
सिर पे रहे कर छाँव तुम्हारी
मैं हर से करूँ पुकार ।
करूँ चरण स्पर्श तुम्हार …..

दया करुणा का भण्डार हो
हो सेवक समाज अपार
हरि लगन हरदम रही
क्षमा रहा व्यवहार ।
जल स्वयं प्रकाश दिया
जैसे जलता दीप साकार ।
करूँ चरण स्पर्श तुम्हार
बार बार, बार कई हजार ।
अभिन्नम् अभिन्नम्, अभिन्नम्
गुरू श्री रामशरण बार बार ।

अंबर

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