*गुरु वेदना*

*आज गुरु की गरिमा, तार-तार हो गई।
* गुरु और शिष्य में तकरार हो गई।
झूठ की सच पर इस तरह मार हो गई,
*’गुरु कुम्हार शिष्य कुंंभ’* की युक्ति
बेकार हो गई।
* आज गुरु की गरिमा, तार-तार हो गई।
न बोलों का न उपदेशों का,
ये समय मात्र बड़बोलों का।
*शिक्षा की कड़ी बीमार हो गई।*
आज गुरु की गरिमा, तार-तार हो गई।
धूमिल धूसिर हो गई महिमा अब
बचा न कोई सार।
पता नहीं किस ओर बढ़ेगा,
अब नया संसार।
*गुरु की शिक्षा लाचार हो गई।।*
आज गुरु की गरिमा, तार-तार हो गई।
अरे! जिसके लिए गुरु,
स्व-परवाह नहीं करता।
वही शिष्य अपमान करने से,
तनिक नहीं डरता।
*नवीन-शिक्षा-प्रणाली की जिम्मेदार,
सरकार हो गई।* आज गुरु की गरिमा,
तार-तार हो गई।
करे उद्दंडता चाहे कोई करे गुरु-अपमान।
शिक्षक हो तुम सहना चुप रह,
जो चाहते गर सम्मान।
गुरु-शिष्य परंपरा की जिम्मेदार सरकार हो गई।।
*’मयंक’ अब शिक्षा लाचार हो गई।*
आज गुरु की गरिमा, तार-तार हो गई।
रचयिता :- श्री के.आर.परमाल ‘मयंक’

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