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गुरु-वन्दना

डॉ तेज स्वरूप भारद्वाज

डॉ तेज स्वरूप भारद्वाज

कविता

October 6, 2016

शिक्षक दिवस पर विशेष
गुरु -वन्दना
हे गुरुवर तम्हें शत-शत प्रणाम ,
तुम ज्ञानालोक सत्पथ के धाम।।हे गुरुवर………
अज्ञान तिमिर बिनाशक तुम,
दुर्बुद्धि कुमार्ग के नाशक तुम ।तुम पूर्ण इकाई जीवन की,
ईश्वर के भी आभासक तुम।
होता उद्धार जो जपते नाम ।।हे गुरुवर………
तुम करते ज्ञान से आलोकित,
सुपथदर्शक जो समयोचित।
तुम ही भविष्य के हो दृष्टा,
तुम ही सहायक जो होते बिचलित।
तुम से ही होते पूर्ण काम ।।हे गुरुवर………..
गुरु कुम्भकारवत् करते बार ,
मालीवत् भी रखते संभार।
गुरु होते शिष्य के शुभचिन्तक,
मॉवत् शिष्य को करते प्यार ।
गुरु होते हैं ईश्वर वनाम।।
हे गुरुवर…………
गुरु होते शिष्य के समालोचक,
वास्तव में होते अवलोकक।
गुरुविन सफल न जीवन होता ,
गुरु होते शिष्य के कष्टमोचक।
हे ज्ञानपुञ्ज लाखों सलाम ।।हे गुरुवर………..
गुरु की महिमा गाते कविजन,
गुरु को प्रथम मनाते सुधीजन ।कबीर सूर तुलसी ने गायी,
गुरु के निकट ही जाते भगवन्।
मत भूलना चाहे मिलजाये दाम।।हे गुरुवर………..
हम सदा गुरू को याद करें,
गुरु से ही हम फरियाद करें।
गुरु का आशिष अनमोल होता ,गुरु पर अपने हम नाज करें।
हम सदा करें ‘गुरुवे नमामि’।।हे गुरुवर……….

परमपूज्य गुरुदेव’DR.H.K.UPADHYAY के श्रीचरणों में सादर समर्पित भावाञ्जलि
???? डाँ0 तेज स्वरूप
भारद्वाज

Author
डॉ तेज स्वरूप भारद्वाज
Assistant professor -:Shanti Niketan (B.Ed.,M.Ed.,BTC) College ,Tehra,Agra मैं बिशेषकर हास्य , व्यंग्य ,हास्य-व्यंग्य,आध्यात्म ,समसामयिक चुनौती भरी समस्याओं आदि पर कवितायें , गीत , गजल, दोहे लघु -कथा , कहानियाँ आदि लिखता हूँ ।
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