कविता · Reading time: 1 minute

” गुरु मिला “

सोने को सुनार मिला ,
मिट्टी को कुम्हार मिला ,
लोहे को लोहार मिला ,
सबको सबका भ्रतार मिला ,
जब मैंने होश संभाला ,
मुझे गुरु का आशीर्वाद मिला ।

मछली को मछुआर मिला ,
फूलों को माली मिला ,
खेत को किसान मिला ,
रूप को श्रृंगार मिला ,
हर शिष्य को गुरु हर बार मिला ,
सबको सबका अधिकार मिला ।

कविता को कवि मिला ,
नदियों को सागर मिला ,
प्यासे को पानी मिला ,
ज्ञान को ज्ञानी मिला ,
देश को भेश मिला ,
शिष्य को गुरु का उपदेश मिला ।

जिंदगी में गुरु का संदेश मिला ,
सबको उसके जीवन का उद्देश्य मिला ,
दिया तले अंधेरा मिला ,
हर शाम को सवेरा मिला ,
पथिक को उसका मार्ग मिला ,
जब सबको सबका गुरु मिला ।

🙏 धन्यवाद 🙏
✍️ ज्योति ✍️

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