गुरु नमन

गुरु के चरणों में करते,
नमन बार-बार हैं,
जिनकी कृपा से होता,
सब का उद्धार है,…२
१) नन्ने थे अबोध हम,
पढ़ना सिखाया था,
मानव जीवन के मूल्यों को,
गुरु ने समझाया था,
गुरु के बिना तो,
लगता अधूरा संसार है,
जिनकी कृपा से होता सब का उद्धार है|
२)वाणी में मिठास उनकी,
कड़वी बोली अच्छी है,
जाना जिसने रहस्य इसका,
गुरुभक्ति वही सच्ची है,
आशीशों की छांव घनेरी,
भरते बुद्धि का भंडार है,
जिनकी कृपा से होता सब का उद्धार है|
३) गुरु द्रोही जगत में,
संकट ही पाता है,
ठोकर खाके घूमघाम के,
अंत में नहीं आता है,
उर में छुपा के रखते,
देखो फिर भी प्यार है,
जिनकी कृपा से होता सब का उद्धार है|
४) आओ आज हम भी,
संकल्प यह उठाते हैं,
जो भी आज्ञा गुरु देवे,
जीवन में अपनाते हैं,
देखो सुनो समझो प्यारो,
“अनुनय” गुरु जीवन का आधार है,
जिनकी कृपा से होता सब का उद्धार है|
“राजेश व्यास” (अनुनय)

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