कविता · Reading time: 1 minute

गुरु गुण लिखा न जाय

नामुमकिन को मुमकिन कर दें मुश्किल को कर दें आसान
ऐसे होते हैं ये गुरुजन होते हैं ये इतने महान

अपने भीतर की ज्वाला से मन में आग लगाते हैं
सोए हुए जज्बातों को भी एक पल में ये जगाते हैं
सत्य अहिंसा और सेवा का ज्ञान हमें सिखलाते हैं
झूठ से नफरत करते हैं और सच्ची राह दिखाते हैं
हमने तो देखा ही नहीं इनके जैसा कोई इन्सान
ऐसे होते हैं ये गुरु जन…….

डॉक्टर अफसर और इन्जीनियर सब इनके ही दम से हैं
जितनी ऊंची ऊंची उड़ाने सब इनके ही रहम से हैं
इनका समर्पण देख ही तो हम भी कुछ कर पाते हैं
फैली फिज़ाओं में जो खुशबू इनके ही गुलशन से है
सबको पड़ी है इनकी जरूरत तब जाकर सब आए काम
ऐसे होते हैं ये गुरु जन…….

तन मन धन और जीवन से ये अपना फर्ज निभाते
ज्ञान की खातिर जीते हैं और ज्ञान पे ही मिट जाते हैं
नन्हे नन्हे पौधों को ये सींच के फूल खिलाते हैं
लाते हैं माँ बाप जहाँ में और ये जीना सिखाते हैं
क्या इससे भी बढ़कर जग में होता है कोई एहसान
ऐसे होते हैं ये गुरु जन………

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