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“गुरु की महिमा” दोहे

Dr.rajni Agrawal

Dr.rajni Agrawal

दोहे

July 9, 2017

“गुरु की महिमा” दोहे

गुरु महिमा गुणगान कर,गुरु को दो सम्मान।
ज्ञान ज्योति का दीप बन,करते भव कल्याण।।

गुरु की गरिमा ईश बढ़,गुरु ब्रह्मा गुरु ज्ञान।
माटी से मूरत गढ़े,गुण अवगुण पहचान।।

गुरु चरणों में स्वर्ग है,तीरथ चारों धाम।
भव सागर से तार दे,गुरु पूजो निष्मका।।

गुरु बिन राह न सूझती,सकल ज्ञान भंडार।
लगन परिश्रम लौ जला,देता हमको तार।।

गुरु जीवन सोपान है, शत शत इन्हें प्रणाम।
गुण देकर अवगुण हरे, कर्म करे निष्काम।।

गुरु ज्ञान भंडार है, पूजो बारंबार।
पाठ पढ़ा कर त्याग का,देता हमको तार।।

डॉ. रजनी अग्रवाल “वाग्देवी रत्ना”
संपादिका-साहित्य धरोहर
महमूरगंज, वाराणसी (मो.-9839664017)

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Author
Dr.rajni Agrawal
 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका। उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न"... Read more
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