गुरु और लघु

गुरु बिन ज्ञान कहाँ?
गुरु बिन ध्यान कहाँ?
गुरु बिन कहाँ जीवन,
गुरु बिन सम्मान कहाँ।।
गुरु बिन राज कहाँ?
गुरु बिन साज कहाँ?
नहीं चढ़ पाये शिखर,
गुरु का आगाज कहाँ।।
इतिहास गुरु गाथा है,
गुरु ब्रम्ह बन जाता है।
गुरु बिन मिले ना गोविंद,
गुरु ही अधिष्ठाता है।।
सदगुरू की खोज में है,
लघु सी इस सोच में है।
बिक नहीं सकता वह,
गुरु एकलव्य बनाता है।।
(डॉ शिव”लहरी”)

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 1 Comment 0
Views 185

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share