कविता · Reading time: 1 minute

गुरुर मत करो

एक जबरदस्त रचना👇

“गुरुर मत करो”

क्या लेकर आये है
क्या लेकर जाएंगे ।
बिन कोई सन्देश दिए
वापस हम लौट जाएंगे।।

बन्द मुट्ठी आये थे
खुले करके जाएंगे।
बिन कोई सन्देश दिए
वापस हम लौट जाएंगे।।

रिश्ता निभाने चले थे
बेवफा बनके जाएंगे।
बिन कोई सन्देश दिए
वापस हम लौट जाएंगे।।

अरे नफरत अगर मुझसे है
तो दूर हम चल जाएंगे।
बिन कोई सन्देश दिए
वापस हम लौट जाएंगे।।

गुरुर किस बात की है गुरु
एक दिन मिट्टी में मील जाएंगे।
बिन कोई सन्देश दिए
वापस हम लौट जाएंगे।।

अच्छे कर्म कर ले भाई
तेरे गुड़गान गवाएंगे।
बिन कोई सन्देश दिए
वापस हम लौट जाएंगे।।

( कुमार अनु ओझा )

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