गुम होतीं बेटियाँ खोता भविष्य

अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट आयी
बिटिया कोख से चिल्लाई |
जन्म दे मुझे भी माँ
मैं भी जीना चाहती हूँ ||
भगवान की बनाई इस सृष्टि को
मैं ही तो चलाती हूँ…..
फिर क्यूँ माँ मैं
कोख में ही मिटा दी जाती हूँ?…
नौ महीने कोख में रहकर…
वंश (बेटा )मुझ से ही बनता है |
फिर क्यूँ माँ क्यूँ?
दुनिया को तेरा अंश यूँ खलता है….. ||
सुन बिटिया की चाहत …
माँं हो गयी आहत…
खुद को काबूकर व्याकुल हो बोली…
तेरा भ्रूण मिटाने को मैं खा रही थी गोली..
तू तो मेरा अंश है ,चलाती वंश है…
मुझे नाज है तुझ पर ..
तूने मेरा अन्तर्मन झकझोर दिया..
हिम्मत दिखाकरआज माँ को कातिल बनने से रोक दिया…..
यह मैं कैसे भूल गयी तुझसे ही नारी जाति है..
हर माँ अपनी बिटिया में अपनी झलक पाती है
बेटी तू सही कहती है…
तू मेरी परछाईं है…..
जब से तू कोख में आई….
मैंने नवचेतना पायी है |…..
तेरी बातों को सुनकर..
अब मुझमें भी हिम्मत आयी है…
तेरा अस्तित्व बचाने को…
आज एक माँ ने आवाज उठायी है..
पर…….पर,…….
यह संसार नहीं तेरे लिये….
तू क्यूँ जग में आना चाहती है?
यहाँ हर रोज हँसती खिलखिलाती गुड़िया…
हवस के लिए मिटा दी जाती है ||….
तेरे होने से सारे जग में उजाला है ..
तूने ही नर को अपने अन्दर पाला है…..
तुझसे जिसका अस्तित्व बना है…….
वही तुझको मिटाता है ….
दुनिया का यह रुप बेटी मुझे….
बिल्कुल भी नहीं भाता है |………
पहले तुझको इस दुनिया में….
मान _सम्मान दिलाना है |….
फिर मेरी गुड़िया तुझको…
इस दुनिया में लाना है||…..
संसार को पहले तेरी अहमियत
जानना होगा….
कल्पना करके देखो..दुनिया वालों..
बेटी बिन क्या जमाना होगा?…..
कोरी बातें करने से….
अब कुछ नहीं होना है |….
अपनी करनी का बोझ …
मनुष्य तुझको भविष्य में ढोना है ||…
बेटी तो कुदरत का अनमोल फूल है…
इसको मिटाना मानव की सबसे बड़ी भूल है…
नहीं बनेगी कली तो….
बगिया कैसे महकेगी ?….
फूल बनकर नहीं खिली तो….
ज़िन्दगी कैसे चहकेगी||….
रोक लो कलियों और फूलों का मसला जाना…
नहीं तो गुलशन वीरान हो जायेंगे..
फूलों में ही बीज छुपा है…
नये पौधे कैसे लहलहायेंगे ||….
कहाँ से आयेंगी किरन, कल्पना,इन्द्रा सरोजनी.
और कैसे इतिहास बनायेंगी ..
जब पैदा होने से पहले …
कोख में ही मिटा दी जायेंगी…
कहे रागिनी बिल्कुल सच्ची बात खरी….
बेटे चाहने बालों को लगेगी बहुत बुरी ||…
वर्तमान को बचाओगे…
तभी तो भविष्य पाओगे|…
नहीं तो आगे जाकर…
सुभाष, गांधी, भगत, जवाहर कहाँ से लाओगे?…
सुन लो बिटिया की आहट को…
जीवन दो उसकी चाहत को||…
जन्म दे उसे भी माँ…
वो भी जीना चाहती है |…
जीने दे उसको ऐ मानव…
वो भी जीना चाहती है ||

Like 2 Comment 0
Views 3.2k

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share