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** गुमसुम आज मेरा दिल है **

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

मुक्तक

March 20, 2017

?रुक गयी है स्वांसे

थम गयी है आंधियां

न जाने कौन सा कत्ल

कर आया जो गुमसुम

आज मेरा दिल है ।।
?मधुप बैरागी

दिल धड़कता है

किसी हसी मुखड़े को देखकर
मगर

ये क्या

मेरे दिल को किसी ने यूं

उसकी जगह से बाहर निकाला किसने

दिल पूछता है उससे

जिसने जिस्म से अलग किया इस दिल को
कहां है वो दिलबर

जिसने दरबदर की ठोकरें खाने के वास्ते छोड़ा

इस क़दर

एकबार आकर तो कह दे

मुझे तुम से प्यार है

आज भी यह दिल धड़कता है

सिर्फ तुम्हारे लिए

देख इसकी धड़कनों को

इसे तेरा इंतजार आज भी है ।।
?मधुप बैरागी

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Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल 13.7.2017 स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना... Read more

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