Apr 13, 2021 · कविता
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गुड़ी पड़वा– नव वर्ष

***गुड़ी पड़वा***
नया वर्ष है छाया हर्ष है,शुभ बेला जो आई।
देश के जन-जन को देते हैं, हम तो आज बधाई।।
स्वीकार करो बधाई, हरना पीर पराई।
देती है संदेश सभी को, अपनी भारत माई।।
सुख समृद्धि लोटे जग में, अनुनय ने आस लगाई।।
भूल न जाना,सबको याद दिलाना।
संस्कृति सभ्यता,संस्कार जो है थे हमारे।
हर पल हर क्षण उनको अपनाना।।
मां जगदम्बे, जय जय अम्बे,घर घर आज विराजेगी।
चैत्र नवरात्रि खुशियों से झोली भर देगी।।
हे आशा विश्वास हमारा,शांति खुशहाली फिर आएगी।
कोरो ना की काली छाया,जग सारे से टल जाएगी।।
राजेश व्यास अनुनय
🙏गुड़ी पड़वा नववर्ष की सभी को मंगलमय कामनाएं🙏

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Rajesh vyas
Rajesh vyas ""anunay""
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रग रग में मानवता बहती। हरदम मुझसे कहती रहती। दे जाऊं कुछ और ,जमाने तुझको,... View full profile
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