Skip to content

गुड़िया आई गुझिया लाई

Vindhya Prakash Mishra

Vindhya Prakash Mishra

कविता

July 30, 2017

गुड़िया आई गुझिया लाई
सावन का मौसम मनभावन
डाल डाल पर पड गए झूले
हम सब झूले मन भी झूमे
कजरी गीत सुनी सुहाई
गुड़िया आई गुझिया लाई।
पावन सावन शिव मास है
भोले का यह मास खास है
बादल दिखते आसमान में
मौसम शीतल है सुखदाई
गुड़िया आई गुझिया लाई।
रिमझिम बूँदे पडी खेत मे
जीवन दिखने लगा रेत मे
खुशियाँ दिखने लगी क्षेत्र में
घर घर में खुशहाली छाई।
गुड़िया आई गुझिया लाई।
तरह तरह के भोजन बनते
मठरी और समोसे छनते।
चिप्स पापड भी जमकर बनते।
गुझिया बनती बनी मिठाई ।
गुड़िया आई गुझिया लाई।

Share this:
Author
Vindhya Prakash Mishra
विन्ध्यप्रकाश मिश्र विप्र साहित्य सृजन में रूचि रखता हूँ । चिंतनशील जीव होने के कारण कुछ न कुछ सृजित करता हूँ । पर वीणापाणि माँ की कृपा दृष्टि के बिना सम्भव नहीं है । एक साधना के रूप में मनन... Read more
Recommended for you