Jun 10, 2021 · कविता
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गुज़ारा

गुजारा हो रहा है
गवारा हो न हो
पर गुजारा हो रहा है
अभी है मेहनत के दिन,
अभी भाग्य सो रहा है,
पर यकीन मानिये साहिब,
गुजारा हो रहा है
इक दिन हरियाला
सावन आएगा,
क्या हुआ जो
अभी तपती धूप है,
जीवन रूद्र गायन बन
रो रहा है,
पर यकीन मानिये साहिब
गुजारा हो रहा है
मिट्टी में मिट्टी हो कर
अभी बन रही है भाग्य मूर्त,
उज्जला भविष्य आज की
कालिख धो रहा है ,
पर यकीन मानिये साहिब
गुजारा हो रहा है

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अंजनीत निज्जर
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कवयित्री हूँ या नहीं, नहीं जानती पर लिखती हूँ जो मन में आता है !!... View full profile
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