.
Skip to content

गुजरे लम्हे

Raj Vig

Raj Vig

कविता

August 26, 2017

गुजर गये हैं जो
लम्हे जिन्दगी के
लौट कर नही आयेंगे
वो मुकाम बीते सफर के ।

गुजर गये हैं जो
तूफान गमो के
साथ उड़ा ले गये है
सैलाब छलकते आंसुओं के ।

गुजर गये हैं जो
काफिले बहार के
छोड़ गये हैं
निशान अपनी दास्तान के ।

गुजर गये हैं जो
लोग इस दुनिया के
गुमनाम हो गये हैं जैसे
पन्ने किसी पुरानी किताब के ।।

राज विग

Author
Raj Vig
Recommended Posts
मुक्तक :-- आसान लम्हे हो गये !!
मुक्तक :-- आसान लम्हे हो गये !! अनुज तिवारी "इन्दवार" वक्त जब वश में हुआ आसान लम्हे हो गये ! और मुश्किल वक्त पर शैतान... Read more
तेरी  मुहब्बत  में  हम  खुद से गये हैं
तेरी मुहब्बत में हम खुद से गये हैं पहले बहुत कुछ थे अब कुछ से गये हैं झड़ गये पत्ते शाख से बिछड़े फूल आँधियों... Read more
*ये वो क्या कर गये*
Sonu Jain कविता Nov 19, 2017
*ये वो क्या कर गये* अपने ही हाथों ख़ुद हाल बेहाल कर गये,, किसी का न हुआ आज तक वो इश्क करगये।। हद से गुजर... Read more
गांव पर रचना
गांव जब से शहर हो गये नेता तब से अंगूर हो गये , छोड़ दिया लोंगों का सांथ क्योकि वे मजबूर हो गये गांव जब... Read more