गीत

“आशाओं के दीप”

आशाओं के दीप जलाकर
सुंदर स्वप्न जगाए रखना,
नया जोश उल्लास भरे तुम
सुरभित सुमन खिलाए रखना।

मन में उपजी प्रीत पिया की
रोम-रोम हर्षित कर देती
एक नेह की अभिलाषा में
घर-आँगन पुलकित कर देती।

उदित भानु से जीवन में तुम-
जगमग ज्योति जलाए रखना।
सुंदर स्वप्न जगाए रखना।।

व्यथा बढ़े जब अंतर्मन में
रिश्ते-नाते टूट रहे हों
छोटी-छोटी खुशियों के क्षण
अपने अपनों से लूट रहे हों।

हर विपदा से टकरा कर तुम-
उम्मीद की डोर थमाए रखना।
सुंदर स्वप्न जगाए रखना।।

दुख-दुविधाएँ राह खड़े हों
मंजिल कोई सूझ न पाए
भवसागर में फँसी ज़िंदगी
कश्ती मेरी डूब न जाए।

बन नाविक पतवार सँभाले-
अपना साथ बनाए रखना।
सुंदर स्वप्न जगाए रखना।।

डॉ. रजनी अग्रवाल ‘वाग्देवी रत्ना’
वाराणसी(उ.प्र.)
संपादिका-साहित्य धरोहर

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