"गीत"

स्थाई-
*****
माँ वाणी को शीश झुकाना |
वन्दन अर्चन करते जाना ||
कविवर तुम समाज के दर्पण |
दोष दिखाना राह बताना ||
माँ वाणी को शीश झुकाना…..
अंतरा –
*****
कठिन दौर में मानव जीवन
फटे हृदय हैं उधड़े सीवन |
स्वार्थ दम्भ का विस्तृत दामन
निस्वार्थ तुम्हें चलते जाना
माँ वाणी को शीश झुकाना …….

कलम तुम्हारी राह दिखाए
भले बुरे का ज्ञान कराए |
बस इतनी है विनती भैया
जोश नया नव चेतन लाना
माँ वाणी को शीश झुकाना …..

कुछ हैं विमुख कर्त्तव्य पथ से |
कुछ भटके अहंकार मद से |
कलम उठाना जब भी कविवर
सुगम राह उनको दिखलाना
माँ वाणी को शीश झुकना ……
“छाया”

Like 1 Comment 0
Views 16

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share