.
Skip to content

*** गीत ***

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

गीत

May 31, 2017

गीत
प्रारम्भिक बोल ?

बैठी हूं इंतजार करूं
देखूं ऊंट सवार घणू
देखूं थांरी छवि घणी
नैणा में रख प्यार करुं ।।
******************
प्रीतम म्हारे हिवड़े री
हिवड़े में राखयो जी
निरखण लागी घर री नार
घर कद पधारोगा भरतार
सूनी सूनी रातड़ली में
तारा गिण काढ़ा सारी रात
घर कद पधारोगा म्हारा भरतार
चांदणी रातां म्हारी बैरण
बण गयी नींदड़ली
सुपनो जाग्यां कैयां आवे
आ बैरण बण गयी नींदडली
रूखां नीचे बैठी रोऊं
जोऊं थारी बाटड़ली
नैण भया बिन नीर उदास
धोरां माहीं सूजे नांही
हो गया कण्ठ उदास
गातां गातां थारी अरदास
सुणै नाहीं कोई बातड़ली
इब बता दे धरुं कैयां धीर
निहारूं थारी बाटड़ली
प्रीतम म्हाने हिवड़े में राख्यो
निरखूं थांरी भोळीभाळी सूरतड़ी
प्रीतम म्हारे हिवड़े री
हिवड़े में राख्यो जी ।।
?मधुप बैरागी

Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more
Recommended Posts
म्हारी मायड़ भाषा
✍? ✍? ✍? मिनख मिनख री प्यारी बोली, म्हारै मायङ राजस्थान री क्यु बिसराई इ संविधानां म, बोली मायङ राजस्थान री सुरमा सा रणवीर निपजावै,... Read more
कोचिंग कोटा के विद्यार्थियों  के मन से
* विद्यार्थी व्यथा * *******हाडौती में गीत******* अरी एरी बता, कद आवगी, मन म साता । पडबा लिखबा म ही बीत, जोबन की राता। पन्द्रह... Read more
*** जल -बिन  मीन ***
रैन गयी रमता-रमता दिवस भयो परभात जिण मिलना था मिली गया वा मिलन री रात पिव गयो परदेश सिधार आवे याद मिलण री रात पिवजी... Read more
दोहे
शब्द शब्द मुखरित हुआ, छंद छंद नव गीत, मन वीणा बजने लगी, कुसुमित होती प्रीत। गीत नही ये साजना,प्रणय भाव निष्काम, जीवन के हर पृष्ठ... Read more