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गीत

Dr. umesh chandra srivastava

Dr. umesh chandra srivastava

गीत

February 14, 2017

. …. गीत …..

चिर- पुरातन प्रेम की नित
बह रही नव धवल धारा
थिर धरातल सुखद संगम
रूप सुन्दरतम् तुम्हारा
कोटि तारक अवनि अम्बर
शशि- कला रवि नृत्य वंदन
नाद सुर लय दिक्- दिगंतर
सूक्ष्मतम् अणु- चित्त बन्धन
चिर- प्रकृति संगीत जीवन
से प्रभावित जगत सारा
कामना की सरस कलियों
से खिला मम् हृदय- मधुबन
भावना की रागिनी फिर
गूँजती उर सजग कण- कण
चेतना की रश्मियों से
खिल उठा जग – जलज सारा
सृष्टि निर्मित जीव- जड़ से
किन्तु अभिनय विधि रचित है
जन्म जीवन मृत्यु सुख दुःख
हैं प्रयोजित शुचि निहित है
क्षरण सर्जन रीति कालिक
स्वत्व अभिनव प्रेम द्वारा

डा. उमेश चन्द्र श्रीवास्तव
लखनऊ

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Author
Dr. umesh chandra srivastava
Doctor (Physician) ; Hindi & English POET , live in Lucknow U.P.India
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