गीत

बाबा के दुलारी धीया, अम्मा के भी प्यारी हो
चरखा की सूत भईली बिटिया हमारी हो
ललना सब राग गावें, धियवा भईल भारी हो
कइसे बचाईं इनका इनकर जिनगी दुधारी हो
एहि जुग के राछस से बछिया कैसे जाई उबारी हो
खेत खलिहन्वा में धिया जाये मारी हो
केहू न बचाए इनका करे बस पुछारी हो
मुनरी हेराईल बा की चुनरी में लागल दाग हो
काहे बैरिन भइलें भाग्य विधाता हो
धियवा सब पूजे जिनको भोर अनहिरोखे…???
सांझे बारे दिया बाती तभीयो अजोर काहे न बुझाता
बबुआ सब पूछे आके बछिया के दुआरी हो
…सिद्धार्थ

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