गीत

अधरों पर घुलता रहा, जीवन का संगीत|
अपनी परछाई मुझे, क्यों करती भयभीत||

है जीवन संगीत-सम,हँसते-गाते झूम|
सुर छिड़ जाये कौन- सा,किसको है मालूम||

साँस-साँस सुर से सजी,जीवन है संगीत|
सुख दुख है स्वर की लहर,गा कर पाओ जीत||

सत कर्मों की बाँसुरी,छेड़े मधुरिम गीत|
व्याकुलता को त्याग कर, इससे कर लो प्रीत||

कभी शोर में गीत है, कभी गीत में शोर|
मन के भावों से जुड़ी, जीवन की हर डोर||

सजा हुआ संगीत से, जीवन का हर अंश |
है जीवन इसके बिना, केवल चुभता दंश||

-लक्ष्मी सिंह

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