गीत संग्रह से : तलाश एक दास्तां

मैंनें ढूंढा तुम्हें, सारी उम्र भर,इस पार से उस पार तक,इक अथक तलाश जारी है,घर के आंगन से स्वर्ग के द्वार तक,सारी जिन्दगी आशाओं की मीनार बन के रह गयी,मैंनें बुलंदियों को छुआ मगर तुम्हें देखने को संसार तक,नदिया थी तुम मैं किनारा था,तन- मन से सब तुम्हारा था,मेरा साथ छोडा तुमने जो, तो छूटा मेरा परिवार तक,जो भी कसमें वादे किये थे तब,मैं अब भी उनको निभा रहा,मेरी जिन्दगी कुर्बान है मेरी सांसों के अंतिम बार तक,ये सदायें अपने प्यार की, सुन रहा है सारा जहां मगर,इक नज्म तुम भी सुन सको, मेरे दर्द- ए-दिल की पुकार तक,जो लिखा पढा भी है मैंनें वो,संगीत सुर भी तुम्हारे हैं,मैं कैसे तुमसे कह सकूं,तो ये खबर गई अखबार तक ||

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एक हिन्दी कवि एवं लेखक जो कविता, गीत, गजल, मुक्तक, दोहा, छंद रचनाकार श्रंगार रस...
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