गीत ....पीने दो नींद में

…….पीने दो नींद में …….

कुछ देर चैन से मुझे , सोने दो नींद में
जो कह सका ना उनसे, कहने दो नींद में
कुछ देर चैन से मुझे ………….

टूटी जो नींद मेरी , तन्हाईयां डसेंगी
यादों को मेरी मुझको , परछाईयां डसेंगी
कुछ कहकहे लगते है , लगने दो नींद में
कुछ देर चैन से मुझे …………

पीनें की तलब मेरी , जवान हो रही है
कहतें है लोग नीयत , बेईमान हो रही है
नजरें मिली नजर से , पीने दो नींद में
कुछ देर चैन से मुझे ………..

शानों पै मेरे उसका , सर रखा हुआ है
होठों पै होठों का , मरहम रखा हुआ है
मरता हूँ रोज जगते, जीनें दो नींद में
कुछ देर चैन से मुझे ………..

दुनिया से बेखबर मै , ना अपना ही होश है
कैसा चढा ये “सागर”, मुझको ये जोश है
जो कर सके ना जगते , करने दो नींद में
कुछ देर चैन से मुझे ………..!!

मूल रचनाकार ……
डाँ. नरेश कुमार ” सागर “

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