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गीत- तुमसे मिलन की चाह में...

गीत- तुमसे मिलन की चाह में…
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तुमसे मिलन की चाह में इतना दिवाना हो गया
कल ही मिला तुमसे मगर लगता ज़माना हो गया

है याद आती चूड़ियों की खनखनाहट रातभर
महसूस करता हूँ सदा मैं तेरी आहट रातभर
तेरी नज़र का हाय ऐसे दिल निशाना हो गया-
कल ही मिला तुमसे मगर लगता ज़माना हो गया

इक फूल के बिन बाग़ में भौंरे बहुत रोते सनम
अब चैन मिलता है कहाँ जब तुम नहीं होते सनम
तेरे व मेरे बीच यह कैसा फ़साना हो गया-
कल ही मिला तुमसे मगर लगता ज़माना हो गया

ऐ चाँद क्यों रहने लगा तू बादलों के गाँव में
मैं अबतलक बैठा नहीं हूँ गेसुओं की छाँव में
मैं गा नहीं पाया मुहब्बत वो तराना हो गया-
कल ही मिला तुमसे मगर लगता ज़माना हो गया

– आकाश महेशपुरी
दिनांक- 13/01/2020

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